ओलंपिक 2016 के मुकाबले इस बार पीवी सिंधु पर क्यों है ज्यादा दबाव? जानिए

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टोक्यो ओलंपिक शुरू होने में अब 24 घंटे का समय रह गया है. टोक्यो अपने दूसरे ओलंपिक के लिए तैयार है. भारतीय खिलाड़ी खेल गांव पहुंच चुके हैं. जिनमें रियो ओलंपिक 2016 की गोल्ड मेडलिस्ट स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु का नाम भी है. पीवी सिंधु ओलंपिक में जाने वाली अकेली महिला भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं. लेकिन इस बार उनपर ज्यादा दबाव है और ज्यादा चुनौतियां भी हैं. एबीपी न्यूज के ओलंपिक स्पेशल ई-कॉन्क्लेव में पीवी सिंधु ने खुद ये बात कही है.

पीवी सिंधु ने कहा, “रियो ओलंपिक 2016 में सिंधु एक अंडरडॉग थी लेकिन अब 2021 में सब सोचते हैं कि सिंधु जाएगी तो मेडल वापस लेकर आना है. वो दबाव रहता है लेकिन मैं सिर्फ फोकस के साथ अपना गेम खेलना चाहती हूं. कभी ये नहीं सोचा कि बाहर लोग क्या सोचते हैं. उससे और ज्यादा दबाव बनता है. इसलिए मैं सिर्फ खेलने के बारे में सोचती हूं. जब जीत जाती हूं तो सभी के लिए गर्व की बात होती है.”

ओलंपिक स्पेशल ई-कॉन्क्लेव में पीवी सिंधु ने बताया, “इस बार चुनौतियां भी ज्यादा होंगी क्योंकि इस बार का ओलंपिक पिछली बार से बहुत अलग है. हर दिन हमारा कोविड का टेस्ट होगा. मास्क हमेशा पहनकर रखना है. बाहर नहीं जा सकते हैं. ये आसान नहीं होगा लेकिन ये अच्छी बात है. जापान सरकार नियमों का सख्ती से पालन कर रही है.”

सिंधु ओलंपिक में गोल्ड मेडल के प्रमुख दावेदारों में शुमार

रियो ओलंपिक के बाद अब तक पीवी सिंधु कई गोल्ड सिल्वर और ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम कर चुकी हैं. एक बार फिर पूरे देश की नजरें पीवी सिंधु पर टिकी हुई हैं. पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पीवी सिंधु के साथ वर्चुअल संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया था और उनसे बिना दबाव के ओलंपिक में खेलने के लिए कहा था. पीवी सिंधु इस बार ओलंपिक में गोल्ड मेडल के प्रमुख दावेदारों में शुमार हैं. 

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